केएसके महानदी पावर प्रोजेक्ट के अधीन सी एस आर के तत्वाधान में एंबुलेंस संचालित है मगर स्टाफ डॉक्टर कंपाउंडर संबंधित गाड़ी में उपलब्ध नहीं।

Views

 



रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ राज्य।


जांजगीर-चांपा।केएसके महानदी पावर प्रोजेक्ट कंपनी नरियारा में संचालित है 3600 मेगावाट की कंपनी है मगर इस कंपनी में सीएस आर फंड के द्वारा एम्बुलेंस एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है मगर उस एंबुलेंस गाड़ी में डॉक्टर कंपाउंडर नर्स उपलब्ध नहीं रहने के कारण एवं प्राथमिक उपचार की उपकरण पेरासिटामोल टैबलेट एवं ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं उपलब्ध रहता जिसके कारण दुर्घटना में घायल व्यक्ति को ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड़ देता है यह कहानी है केएस के महानदी पावर प्रोजेक्ट द्वारा संचालित है। 



वर्तमान समय में कंपनी बिक चुकी है जिस कंपनी के हाथों में बिक्री नामा हुई है उसे कंपनी का नाम है जेएसडब्ल्यू के द्वारा किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी जा रही है जबकि नरियारा तरौद मुरलीढीह एवं अन्य गांवों को वसीयत में गोदनामा लिया है उन गांव के विकास के संबंध में किसी भी प्रकार का कार्यवाही नहीं कर रहा है जिसके कारण परेशान है एवं इसके साथ ही साथ संबंधित क्षेत्र के सड़कों का भी निर्माण कार्य करने का जिम्मा लिया है एवं आश्रित ग्रामों के रहने वाले शिक्षित बेरोजगारों को नौकरी में रखने का वादा किया था मगर उन वादा से मुकर रहा है।


हमारे रिपोर्टर राकेश कुमार साहू कहते हैं कि जिस एंबुलेंस वहां की बात की जा रही है एंबुलेंस वहां का औचक निरीक्षण किया गया निरीक्षण के दौरान में डॉक्टर नर्स कंपाउंडर एवं ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं रहता इन चीजों की नहीं रहने की वजह से आपातकाल में संबंधित कंपनी की गाड़ी को बुलाई जाती है तो निरीक्षण एवं उपचार अर्थ के लिए ले जाने के लिए गाड़ी को देखा जाता है तो गाड़ी में केवल ड्राइवर रहता है डॉक्टर कंपाउंडर नर्स एवं ऑक्सीजन सिलेंडर एवं प्राथमिक उपचार की किसी भी प्रकार की सामग्री उपलब्ध नहीं रहती।


एवं संबंधित कंपनी के द्वारा एंबुलेंस संचालित की गई है एंबुलेंस से मरीज को ले जाने का काम करती है और कंपनी के द्वारा प्राइवेट हॉस्पिटल में भारती कर दिया जाता है जिससे उनकी बिल की बढ़ोतरी होती है बिल की वसूली हो जाती है कमीशन प्राइवेट हॉस्पिटल से बंधी हुई है एवं सरकारी अस्पताल में किसी भी मरीज को नहीं ले जाता क्योंकि सरकारी अस्पताल से कमीशन नहीं मिलता जिसके कारण प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कर दिया जाता है और गरीबी स्थिति वाले का बजट गड़बड़ा जाता है क्योंकि आर्थिक बोझ के तले कर्मचारी जो श्रमिक वर्ग के हैं उनको भुगतना पड़ता है आज ऐसी स्थिति है कि जिला प्रशासन एवं राज्य शासन के द्वारा नियंत्रण भी नहीं रहता यह नियंत्रण इसलिए नहीं रहता की राजनीति करने वाले राजनेताओं का कमीशन पहुंच जाता है जिसकी वजह से कंपनी प्रबंधन के द्वारा किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी जा रही है श्रमिकों को एवं आश्रित ग्रामों को यह कैसी विडंबना है कि कहा जाता है कि दिया तले अंधेरा क्योंकि जिस जगह पर बिजली उत्पादन होती है उसे जगह की लाइन की व्यवस्था कैमरा जाती है 24 घंटा बिजली उपलब्ध नहीं होता इस तरह से नरियारा में महानदी पावर प्रोजेक्ट का हाल हैं।


संबंधित कंपनी का स्वयं का हॉस्पिटल नहीं है स्वयं का स्कूल नहीं है एवं श्रमिकों को लाने ले जाने के लिए बस की सुविधा नहीं है नजर से जो भी कर्मचारी जाता है काम करने के लिए वह कर्मचारी अपने स्वयं के साधन से जाता है जबकि अन्य कंपनी में अपने कर्मचारियों को लाने ले जाने की परिवहन की व्यवस्था करता है मगर यह अपने कर्मचारियों को परिवहन की व्यवस्था नहीं दे रहा है।


और कंपनी के जो भी नर्स एवं स्टाफ है उन्हें अन्यत्र हॉस्पिटल में नियुक्त करके भेज दिया गया है क्योंकि स्वयं का अस्पताल संचालित करने में असमर्थ हो रहा है।


हमारे संवाददाता कहते हैं कि इस तरह परेशानी बनी रहेगी तो आगे चलकर क्या भविष्य रहेगा क्षेत्र की कंपनी क्षेत्र की जनता को सुविधा देने में आनाकानी कर रहा है इससे साफ जाहिर होता है कंपनी हमें लूट रही है।



रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ राज्य।

0/Post a Comment/Comments

Ads 1

Sidebar Ads