कांग्रेस पार्टी में जिला अध्यक्ष की जो घोषणा की गई है हितेषी को बना दिया जिला अध्यक्ष जो काम के नकाज के दुश्मन अनाज के वाली कहावत चरितार्थ हो रही है कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष की नियुक्ति होने के बाद।

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रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा।

 गजमती भानु को कांग्रेस जिला अध्यक्ष बनाना बना विवाद की जड़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में संगठन में जबरदस्त बवाल


गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जांजगीर चांपा।

कांग्रेस संगठन की नई जिलेवार सूची में श्रीमती गजमती भानु को ज़िला अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद से पूरे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में राजनीतिक भूचाल आ गया है। वर्षों से पार्टी के लिए संघर्ष कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है और संगठन के भीतर तीखा विरोध खुलकर सामने आ गया है।


कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन सृजन अभियान के दौरान आए पर्यवेक्षकों के सामने श्रीमती गजमती भानु का नाम कहीं भी प्रस्तावित नहीं हुआ था। इसके बावजूद उन्हें सीधे ज़िला अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर कांग्रेसियों में गहरी नाराज़गी है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह नियुक्ति जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर सीधा प्रहार है।


“दल बदलने वालों को इनाम, निष्ठावानों की अनदेखी”


आक्रोशित कांग्रेसजनों का आरोप है कि श्रीमती गजमती भानु का राजनीतिक इतिहास लगातार दल बदलने से जुड़ा रहा है। वे पहले गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, इसके बाद भारतीय जनता पार्टी, फिर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और आरएसएस से जुड़े धर्म जागरण मंच से भी जुड़ी रही हैं।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस की ज़िला कमान सौंपना पार्टी की वैचारिक निष्ठा और संगठनात्मक मजबूती दोनों पर सवाल खड़ा करता है।


स्थानीय नेताओं का आरोप है कि – “आज कांग्रेस के लिए सड़क पर संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को किनारे कर ऐसे व्यक्ति को ज़िम्मेदारी देना संगठन के साथ विश्वासघात है।”


“राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान की खुलेआम अवहेलना”


कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को सीधे तौर पर राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान का अपमान बताया है। उनका कहना है कि जिस अभियान का मकसद जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आगे लाना था, उसी अभियान की भावना को इस नियुक्ति ने पूरी तरह कुचल दिया है।


कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो इसका सीधा असर भविष्य के चुनावों में कांग्रेस की स्थिति पर पड़ेगा।



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गजमती भानु का पूरा राजनीतिक सफर – विवादों से भरा इतिहास


प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रीमती गजमती भानु, स्वर्गीय श्री अमर सिंह भानु की पत्नी हैं और मूलतः रायगढ़ जिले की निवासी बताई जाती हैं।

उनका राजनीतिक जीवन छत्तीसगढ़ राज्य गठन से पूर्व प्रारंभ हुआ।


2003 तक – गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में सक्रिय सदस्य रहीं।


2004 के बाद – डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में भारतीय जनता पार्टी से जुड़ीं और सक्रिय भूमिका निभाई।


2015 – भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में ग्राम पंचायत सेमरा का चुनाव लड़ा और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी श्रीमती चित्रा सांडे को पराजित किया। इसी दौरान वे भाजपा के समर्थन से गौरेला विकासखंड सरपंच संघ की अध्यक्ष बनीं।


2018 – अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ में शामिल होकर मरवाही विधानसभा चुनाव में सक्रिय रहीं।



इस पूरे राजनीतिक इतिहास को देखते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि “जिस व्यक्ति की पहचान पार्टी बदलने से बनी हो, उसे कांग्रेस की ज़िला अध्यक्ष की कुर्सी सौंपना समझ से परे है।”



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कांग्रेस में हड़कंप, नेताओं पर दबाव बढ़ा


जिलाध्यक्ष नियुक्ति की खबर फैलते ही जिलेभर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हड़कंप मच गया है। कई वरिष्ठ नेता प्रदेश स्तर के कांग्रेस नेताओं से लगातार संपर्क कर अपनी नाराज़गी दर्ज करा रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि यदि यह नियुक्ति वापस नहीं ली गई तो विरोध और तेज किया जाएगा।


“पार्टी को ले डूबेगा यह फैसला”


कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक हालात में इस तरह का विवादास्पद निर्णय कांग्रेस को अंदर से कमजोर कर सकता है। उनका कहना है कि पार्टी पहले ही सत्ता से बाहर है और अब ऐसे फैसले संगठन को और रसातल में ले जा सकते हैं।


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