*नसबंदी कांड के दोषी कथित संभ्रांत आज भी घूम रहे हैं खुलेआम

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 मनीष पाल 
बिलासपुर, इस देश में गरीब होकर मारना सबसे बड़ा पाप है क्योंकि मरने वाला संख्या में एक हो दो हो या दर्जन में हो, उसे कभी न्याय नहीं मिलता। बिलासपुर जिले के पेंडारी क्षेत्र में नेमीचंद जैन अस्पताल में 8 नवंबर 2014 को नसबंदी ऑपरेशन करने का रिकॉर्ड तोड़ने के चक्कर में 18 महिलाओं की मौत हो गई। क्योंकि मरने वाले तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और ओबीसी है। इसमें बड़ी बात कि वे अमीर नहीं थे । अगर होते तो अपना नसबंदी ऑपरेशन किसी बड़े निजी अस्पताल में कर लेते । तभी तो सरकारी योजना के अंतर्गत शिविर में ऑपरेशन कराने आए थे।

घटना के बाद बिलासपुर जिला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से घटनाक्रम के बारे में पूछा कुछ दिन मामला गर्म रहा स्वास्थ्य मंत्रालय की कमान बिलासपुर विधायक के पास थी। सेठ से पर लेकर भाजपा में कौन चलता है लिहाजा रमन सिंह ने सब कुछ धीरे-धीरे ठंडा होने दिया। पहले 2 मौत फिर 3 मौत होते होते 13 मौत और फिर पांच अलग इसमें ऐसे भी मोटे हैं जिसने नसबंदी कराई ही नहीं थी। सिर्फ सिप्रोसीन दवाई जरुर खाई थी मौत विद्यासागर गांव के एक बुजुर्ग की हुई थी जो तखतपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज कराने आया था और डॉक्टर ने यही दवा दी थी। बिलासपुर मेडिकल कॉलेज अपोलो में तडातड मौत के बाद तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सेठ का बयान है। मौत का कारण सप्रोसोमिया 4 दिन बाद स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर शुक्ला का बयान है की दवा में चूहा मार विष पाया गया। कुछ जांच कोलकाता की सरकारी लैब में हुई और दो जांच चंडीगढ़ और दिल्ली की निजी लैब में दे दी गई। यहीं से तो षड्यंत्र शुरू हुआ जिन डॉक्टर गुप्ता को नसबंदी कांड का विलन बताया जा रहा था। उन्हें डॉक्टर शुक्ला के बयान के कारण जमानत मिल गई तीन रिपोर्ट में से सब कुछ गद्दाम गड्ढा हो गया और एक-एक करके नसबंदी कांड के सभी आरोपी बड़ी हो गए।
पीड़ितों के हाथ में न्याय नहीं केवल आंसू आए किसी की मां चल बसी, किसी की बेटी, किसी की बहन और कांड इससे भी बड़ा होता तो मेडिकल माफिया के सरगना को क्या फर्क पड़ता। एम आर ए सब कुछ ठीक कर देता है जनता की अदालत ने उन्हें घर बिट्ठल दिया अब वे सब कुछ भूल कर 15 दिन में सब कुछ ठीक कर देने का वादा करते हैं। क्या 13 महिलाएं जो शहीद हो गई वे वापस लाई जा सकती है। 5 अन्य मौत का हिसाब कौन देगा। पर जिसके हाथ में सत्ता और धन एक साथ आ जाता है उसे नसबंदी कांड कहां याद रहता है। 17 तारीख को बटन दबाने का दिन आएगा बटन पर उंगली रखने के एक बार इन 18 शहीदों को याद जरूर कर लिजियेगा और याद रखें इन्हें मौत की नींद सुलाने वाले आज भी संभ्रांत बनकर घूम रहे हैं फिर से कोई नसबंदी, अखफोडवा, गर्भाशय कांड फिर से देखना पड़े।

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